Pet ki chinta

 

पेट की चिंता अंतड़ीयों में नहीं है बल 

ना कपट है ना किसी से छल …….

चिंता आज की है सोचा किसने कल 

इस समस्या का ढूंढता रहता मैं हल ।

 

सब कुछ देखते देखते बनने लगी  

माथे पर अनुभव की कई रेखाएं 

बाल धूप में यूं ही सफेद नहीं हुए 

खेलता रहा जिंदगी के कई जुएं ।

 

हार – जीत तो है बस एक बहाना  

आधी हकीकत है तो आधा फसाना  

इसी में जिंदगी का सारा अफसाना

मिलके खेलके पढ़के समझते जाना ।

 

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