Prashno ka teer / प्रश्नों का तीर

प्रश्नों  के  बाण  मार – मार 

अपने  मन  को  दे  झंकार 

खोज जगत – जीवन का सार

किस बात का करता इंतजार ।

 

बना  चक्ष्यु  के  व्यूह

माया के भेद चक्रव्यूह 

मथ  प्रज्ञा  के  सागर 

सत्य के परतों को उभार ।

 

बता धर्म की सच्ची परिभाषा 

जीवन की क्या है अभिलाषा 

भौतिकता में जिसे छुपाया है 

कर  उस  सत्य  को  उजागर ।

 

खोजना स्वयं में है आगर 

तूभी है विचारों का सागर

बहा दे अपनी विचारधारा

एक  हो  जाएं  जग सारा ।

 

कल्पना को अपनी दे उड़ान 

स्वयं से देते रहना इम्तिहान 

भ्रम के बादल छटते जाएंगे 

सदा साथ में रखना विज्ञान ।

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